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আমার এই পথ চাওয়াতেই আনন্দ।
চলতে চলতে চলার সাথী পাব এই আশায় আনন্দ॥

আমার এই পথ চাওয়াতেই আনন্দ। চলতে চলতে চলার সাথী পাব এই আশায় আনন্দ॥

रवींद्रनाथ टैगोर
अर्थ

इस राह पर प्रतीक्षा करने में ही आनंद है। चलते-चलते रास्ते में साथी मिल जाएगा, इसी आशा में आनंद है।

विस्तार

यह दोहा हमें सिखाता है कि खुशी सिर्फ मंज़िल तक पहुँचने में नहीं है, बल्कि उस रास्ते पर चलने और इंतजार करने में भी है। इसमें कहा गया है कि रास्ते पर इंतजार करने में ही आनंद है – यानी, आगे बढ़ने की प्रक्रिया और उम्मीद में ही खुशी है। इस बात की आशा में भी एक अलग ही खुशी है कि चलते-चलते आपको कोई हमसफर मिलेगा, कोई ऐसा जिसके साथ आप अपना रास्ता साझा कर सकें। यह सफर के आंतरिक सुख और संगति की आशावादी उम्मीद का जश्न मनाता है, जिससे हर कदम और इंतजार का हर पल सच्ची खुशी का स्रोत बन जाता है।

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