समझेगा जो रहते को नज़ीर अहल-ए-वफ़ा के — नज़ीर अकबराबादी
“When he learns, O Nazeer, the ways of living among the faithful, Then that elegant beloved will come to meet with us.”
अर्थ
जब वह नज़ीर वफ़ादार लोगों के बीच रहने का सलीक़ा सीख लेगा, तब वह ख़ूबसूरत महबूब हमसे मिलने लगेगा।
विस्तार
नज़ीर यहाँ उस नख़रीले, तरहदार महबूब की बात कर रहे हैं जो दूर-दूर रहता है। वे कहते हैं कि जब यह ख़ूबसूरत महबूब वफ़ा करने वालों के तौर-तरीक़े समझ जाएगा, जब उसे पता चलेगा कि सच्चे प्रेमियों के बीच रहने का क्या मतलब है, तब वही अदावाला महबूब हमसे मिलने लगेगा, हमारे क़रीब आने लगेगा। कहने का भाव यह है कि सच्ची वफ़ा और निष्ठा की अपनी ख़ामोश ताक़त होती है। जब महबूब एक वफ़ादार दिल की क़द्र पहचान लेता है, तो दूरी की दीवारें गिर जाती हैं और नज़दीकी मुमकिन हो जाती है। यह भरोसे और उम्मीद भरी एक कोमल बात है।
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