कहाँ तू और कहाँ उस परी का वस्ल नज़ीर — नज़ीर अकबराबादी

कहाँ तू और कहाँ उस परी का वस्ल नज़ीर मियाँ तू छोड़ ये बातें दीवाने-पन की सी

“Where are you, and where the union with that fairy, Nazeer? Give up such talk, my friend—it is but the raving of a madman's heart.”

— नज़ीर अकबराबादी

अर्थ

कहाँ तुम और कहाँ उस परी जैसी सुंदरी से मिलन, नज़ीर! मियाँ, ये बातें छोड़ दो, ये तो दीवानेपन की बातें हैं।

विस्तार

इस शेर में कवि खुद को प्यार से समझाता है। वह कहता है, कहाँ तू और कहाँ उस परी जैसी महबूबा से मिलने की उम्मीद? दोनों के बीच ज़मीन-आसमान का फ़र्क़ है। तू साधारण है, और वह तेरी पहुँच से बहुत दूर। इसलिए, ऐ मियाँ, इन ख़्वाबों को छोड़ दे। नज़ीर अपनी ही चाहत को एक तरह का दीवानापन कहते हैं, ऐसा सपना जो कभी पूरा नहीं होगा। यहाँ एक नरम, आत्म-जागरूक हँसी है, उस आशिक़ की उदासी जो जानता है कि उसकी चाह नामुमकिन है, फिर भी सपने देखना नहीं छोड़ पाता। वह खुद को समझदार बनने और ऐसी नादानी भरी बातें छोड़ने की याद दिलाता है।

Interpretation note: meanings and explanations may be AI-assisted and should not replace a primary text or scholarly edition. See the editorial policy.

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