गर आर है कुछ इसमें तुम्हें तो कुछ ऐ मियाँ — नज़ीर अकबराबादी

गर आर है कुछ इसमें तुम्हें तो कुछ ऐ मियाँ लेजाओ अपने पास दिल-ए-इज़्ज़त-पनाह को

“If you have any objection to it, then O my dear, Take away with you this honor-sheltering heart.”

— नज़ीर अकबराबादी

अर्थ

अगर तुम्हें इसमें कुछ शर्म या एतराज़ है, तो ऐ प्यारे, इस इज़्ज़त की पनाह देने वाले दिल को अपने साथ ले जाओ।

विस्तार

शायर यहाँ चोट खाए हुए स्वाभिमान और हल्की चुनौती के साथ बात करता है। वह कहता है, ऐ मेरे प्यारे, अगर मेरा दिल क़बूल करने में तुम्हें कुछ शर्म या झिझक महसूस होती है, अगर इसमें कोई ऐसी बात है जो तुम्हें अपने से कमतर लगती है, तो यह इज़्ज़त की पनाह रखने वाला, स्वाभिमानी दिल अपने पास ही वापस ले जाओ। यानी मैं इसे वहाँ नहीं देना चाहता जहाँ इसे बोझ समझा जाए या नीचा देखा जाए। यह दिल अपनी आबरू की रखवाली करता है, और अनमने ढंग से अपनाए जाने से बेहतर इसे लौट जाना है। इन शब्दों में गरिमा भी है और एक ख़ामोश दर्द भी। मुहब्बत खुले दिल से अपनाई जानी चाहिए, वरना अपने पास ही रखी जाए।

Interpretation note: meanings and explanations may be AI-assisted and should not replace a primary text or scholarly edition. See the editorial policy.

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