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ઝૂલ્યાં હીંડોળે નવ સાથ બન્યો, લહાવો લીધો ઋતુનાં સુખોનો. રાતે રેલે સુકુસુંબ વસ્ત્રે, વર્ષાદથી છેક ભીંજાઇ રસ્તે;

In swings we swayed, no kinship came to be,The season's pleasures, untouched, passed by for me.At night she roams, in dry saffron attire,On roads by rain completely drenched and dire.

नर्मद
अर्थ

हम झूलों में झूले, पर कोई साथ न बना; ऋतुओं के सुखों का आनंद न ले सके। रात में ही वह सूखे केसरिया वस्त्रों में घूमती है, और बारिश से रास्ते में पूरी तरह भीग जाती है।

विस्तार

यह दोहा जीवन में छूटे हुए सुख और साथी के पलों की बात करता है। इसमें बताया गया है कि कैसे किसी ने हिंडोले पर साथी के साथ झूलने का अवसर खो दिया, और इस तरह ऋतु के छोटे-छोटे आनंदों का भी अनुभव नहीं किया। फिर रात के समय, सूखे, केसरिया वस्त्र पहने हुए भी, वह रास्ते में बारिश से पूरी तरह भीग जाता है। यह उन पछतावों को दर्शाता है जब हम खुशी के पलों को स्वीकार नहीं करते, और बाद में जीवन की कठिनाइयों का अकेले सामना करते हैं, चाहे हमने कितनी भी तैयारी की हो या दिखावा बनाए रखा हो। यह हमें वर्तमान को संजोने और दूसरों से जुड़ने की याद दिलाता है।

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