પ્રસન્ન હું છું, પણ ગોપી ક્યાં છે? હેમંતમાં મેં ભણ્યું વેણ જેહ,

“I am content, but where is Gopi?The flute's melody I learned in winter's chill.”

— नर्मद
अर्थ

मैं प्रसन्न हूँ, पर गोपी कहाँ है? यह मुरली की धुन है जो मैंने हेमन्त ऋतु में सीखी थी।

विस्तार

यह दोहा एक मीठे-कड़वे एहसास को दर्शाता है। वक्ता प्रसन्न है, लेकिन यह खुशी अधूरी है क्योंकि उसकी प्रिय गोपी अनुपस्थित है। 'हेमंत में जो सीखा' वाली पंक्ति यह बताती है कि पिछली सीखें, शायद सर्दी के मौसम से मिली, इस अधूरी खुशी की समझ का आधार हैं। यह गहरे वियोग की भावना को इंगित करता है, जहाँ अपनी प्रसन्नता भी किसी प्रियजन की अनुपस्थिति से फीकी पड़ जाती है।

Interpretation note: meanings and explanations may be AI-assisted and should not replace a primary text or scholarly edition. See the editorial policy.

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