वो हाल-ए-ज़ार है मेरा कि गाह ग़ैर से है — मोमिन ख़ाँ मोमिन
“Such is my wretched state that even to a stranger it is told; yet before you, this whole tale could never be unfolded.”
अर्थ
मेरी दुर्दशा ऐसी है कि कभी किसी ग़ैर के सामने तो बयान हो जाती है, पर तुम्हारे सामने यह पूरी बात कभी कही न जा सकी।
विस्तार
शायर कहता है कि उसका हाल इतना बुरा और टूटा हुआ है कि वह अपना ही नहीं लगता, मानो किसी पराये का हो। उसका दुख इतना गहरा हो गया है कि वह खुद अपनी हालत को पहचान नहीं पाता। और फिर जब वह अपने महबूब के सामने आया, उसी के आगे जिसे वह सब कुछ कहना चाहता था, तो शब्द ही नहीं निकले। उसकी तकलीफ की पूरी कहानी अंदर ही रह गई। इसमें एक गहरी इंसानी बात है: अक्सर हमारी सबसे गहरी भावनाएँ ही कहना सबसे मुश्किल होती हैं। जिसे हम सबसे ज़्यादा चाहते हैं, उसी के सामने हम चुप रह जाते हैं।
Interpretation note: meanings and explanations may be AI-assisted and should not replace a primary text or scholarly edition. See the editorial policy.
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