पास-ए-नामूस-ए-इश्क़ था वर्ना कितने आँसू पलक तक आए थे

“Were it not for the honor of love, how many tears had reached the eyelid.”

— मीर तक़ी मीर
अर्थ

अगर इश्क़ की इज़्ज़त न होती, तो कितने आँसू पलकों तक आ चुके होते।

विस्तार

यह शेर बताता है कि इश्क़ की मोहब्बत में एक नजाकत होती है, एक इज़्ज़त होती है। शायर कहते हैं कि वर्ना... ये आँसू तो पलकों से बह निकले होते। यानी, यह आँसू सिर्फ़ गम का नहीं हैं, बल्कि ये उस मोहब्बत की गहराई का प्रमाण हैं, जिसे हम अपनी इज़्ज़त से बचाकर रख रहे हैं। एक ख़ूबसूरत, पर दर्द भरा अहसास है।

Interpretation note: meanings and explanations may be AI-assisted and should not replace a primary text or scholarly edition. See the editorial policy.

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