शाम से कुछ बुझा सा रहता हूँ — मीर तक़ी मीर
शाम से कुछ बुझा सा रहता हूँ
दिल हुआ है चराग़ मुफ़्लिस का
“Since the evening, I remain somewhat dimmed, My heart is like a destitute lamp.”
— मीर तक़ी मीर
अर्थ
शाम से कुछ बुझा सा रहता हूँ, मेरा दिल एक कंगाल दीपक जैसा हो गया है।
विस्तार
यह शेर दरअसल दिल की उदासी और अंदरूनी थकान को बयां करता है। शायर अपने दिल को एक दीये से तुलना करते हैं, जो शाम होते-होते बुझने लगता है। 'मुफ़्लिस चराग़' का मतलब है कि दीये का तेल या उसकी रौशनी दोनों खत्म हो गए हैं। यह सिर्फ़ गम नहीं है, बल्कि एक तरह का भावनात्मक दिवालियापन है, जब इंसान खुद को खोया हुआ महसूस करता है।
Interpretation note: meanings and explanations may be AI-assisted and should not replace a primary text or scholarly edition. See the editorial policy.
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