Sukhan AI
आया तो सही वो कोई दम के लिए लेकिन
होंटों पे मिरे जब नफ़स-ए-बाज़-पुसीं था

He came, yes, for a moment's whim, but when the breath of my lips was present,

मीर तक़ी मीर
अर्थ

वह तो आया, ज़रूर किसी पल के मनमुटाव के लिए, लेकिन जब मेरे होंठों पर साँसों का जादू था।

विस्तार

यह शेर एक बहुत ही गहरे और उलझे हुए एहसास को बयां करता है। शायर कह रहे हैं कि भले ही महबूब किसी अस्थायी वजह से आया हो, लेकिन असली दर्द तो उस पल में है जब उनके अपने होंठों पर एक मदहोश करने वाली 'नफ़स' थी। यह दिखाता है कि रिश्ते में वियोग का दुःख महबूब के आने से नहीं, बल्कि खुद की उस नज़दीकी और वल्नरेबिलिटी से है, जिसे शायर ने खुद महसूस किया।

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