समझी न बाद-ए-सुब्ह कि आ कर उठा दिया इस फ़ित्ना-ए-ज़माना को नाहक़ जगा दिया

“I didn't realize that the morning breeze had come and awakened This worldly chaos, it had awoken in vain.”

— मीर तक़ी मीर
अर्थ

समझ नहीं पाई कि सुबह की हवा आकर इस ज़माने के फ़ितने को व्यर्थ ही जगा गई।

विस्तार

यह शेर दिल की उलझन को बयान करता है। शायर कहते हैं कि उन्हें समझ नहीं आया कि सुबह की हल्की हवा ने आकर, इस दुनिया के फ़ितने को बेवजह कैसे जगा दिया। यह एहसास होता है कि जीवन में कभी-कभी छोटी सी बात, एक छोटी सी घटना, हमें बड़ी और अनावश्यक परेशानियों में फँसा देती है। यह ज़िंदगी के अचानक आने वाले भ्रम को दर्शाता है।

Interpretation note: meanings and explanations may be AI-assisted and should not replace a primary text or scholarly edition. See the editorial policy.

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