किस शाम से उठा था मिरे दिल में दर्द सा
सो हो चला हूँ पेशतर-अज़-सुब्ह सर्द सा
“Since what evening did a pain arise in my heart, I have fallen into a sleep, colder than pre-dawn's chill.”
— मीर तक़ी मीर
अर्थ
किस शाम से मेरे दिल में दर्द उठा, और मैं सुबह से पहले की ठंड से भी ज़्यादा ठंडी नींद में सो गया।
विस्तार
यह शेर उस दर्द की गहराई को बयां करता है जो अचानक, बिना किसी वजह के, दिल में बस जाता है। शायर पूछ रहे हैं कि यह दर्द किस शाम से उठा... यह कोई बाहरी बात नहीं है, बल्कि एक अंदरूनी ठंडक है। यह उस एहसास की बात है, जो सुबह होने से ठीक पहले महसूस होता है—एक गहरी, उदास बेचैनी।
Interpretation note: meanings and explanations may be AI-assisted and should not replace a primary text or scholarly edition. See the editorial policy.
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