Sukhan AI
क्यूँ न अब्र-ए-सियह सफ़ेद हवा
जब तलक अहद-ए-दीदा-ए-तर था

Why not the dark veil, when the covenant of the eyes was still moist?

मीर तक़ी मीर
अर्थ

क्यों न काले घूंघराे सफेद हवा, जब तक अहद-ए-दीदा-ए-तर था।

विस्तार

यह शेर दरअसल एक टूटे वादे की कहानी कहता है। शायर कहते हैं कि प्रकृति के नियम (काले बादल और सफेद हवा) भी क्यों नहीं माने जा रहे हैं? क्योंकि महबूब की आँखों का जो वादा था, जो नमी थी, वह इतनी गहरी थी कि उसने हर प्राकृतिक संतुलन को बिगाड़ दिया। यह एहसास दिलाता है कि इश्क़ में, वादे से बड़ा कुछ नहीं होता।

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