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पहुँचा क़रीब मर्ग के वो सैद-ए-ना-क़ुबूल
जो तेरी सैद-ए-गाह से टक दूर हो गया

He reached near the edge of death, that Sayyid of unaccepted, who was far from your Sayyid-gah.

मीर तक़ी मीर
अर्थ

पहुँचा क़रीब मौत के वो सैद-ए-ना-क़ुबूल, जो तेरी सैद-ए-गाह से बिल्कुल दूर हो गया।

विस्तार

यह शेर, मिर् तकी मीर की शायरी का एक गहरा तसव्वुर है। 'सैद-ए-गाह' का मतलब है महबूब की रहमत या उसकी जगह। 'सैद-ए-ना-क़ुबूल' वो शख़्स है जिसे महबूब ने स्वीकार नहीं किया। शायर कह रहे हैं कि जिस शख़्स को महबूब की जगह से बहुत दूर कर दिया गया, वो भी आख़िरकार मौत के करीब आ गया। यह दूरी सिर्फ़ जगह की नहीं, बल्कि रूहानी और दिल की भी है!

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पाठ
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