टक गोर-ए-ग़रीबाँ की कर सैर कि दुनिया में उन ज़ुल्म-रसीदों पर क्या क्या न हुआ होगा

“What sights the world has seen in the eyes of the stranger,”

— मीर तक़ी मीर
अर्थ

अजनबी की नज़रों से दुनिया में क्या-क्या नज़ारे देखे होंगे, उन अत्याचारों पर क्या-क्या हुआ होगा।

विस्तार

यह शेर हमें दुनिया के इतिहास और उसके गहरे दर्द पर सोचने को कहता है। मिर्ज़ा तक़ी मीर कहते हैं कि हमें उन पहरेदारों की कब्रों पर चलना चाहिए, और उन ज़ुल्म की रसीदों को देखना चाहिए। यह सिर्फ़ मौत का वर्णन नहीं है, बल्कि उस क्रूरता पर सवाल उठाना है जो सदियों से चली आ रही है। शायर हमें याद दिलाते हैं कि इस दुनिया में कितना दर्द और कितना अन्याय दबा हुआ है।

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