कुछ आओ ज़ुल्फ़ के कूचे में दरपेश
मिज़ाज अपना उधर अब तो गया है
“Come, please, into the alley of your tresses; your disposition has now moved elsewhere.”
— मीर तक़ी मीर
अर्थ
कुछ आओ ज़ुल्फ़ के कूचे में दरपेश, मेरा मिज़ाज अब तो कहीं और चला गया है।
विस्तार
यह शेर एक गहरी, दर्द भरी गुज़ारिश है। शायर यहाँ महबूब से कह रहे हैं कि थोड़ी देर उनके ज़ुल्फ़ों के निजी दायरे में आ जाओ। लेकिन दूसरी पंक्ति में जो मोड़ आता है—कि मेरा मिज़ाज अब कहीं और चला गया है—वह एक कशमकश पैदा करता है। ऐसा लगता है जैसे दिल तो पास बुला रहा है, पर रूह कहीं और ही ठहर गई है। यह इश्क़ की सबसे बड़ी उलझन है।
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