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बेताबियों में तंग हम आए हैं जान से वक़्त-ए-शकेब ख़ुश कि गया दरमियान से

Tired of the restless agony, I have come to life, / Blessed is the moment, I have departed from the middle.

मीर तक़ी मीर
अर्थ

बेताबी से तंग आकर हम जान से आए हैं, और शकेब के समय में दरमियान से खुश हो गए हैं।

विस्तार

यह शेर उस भावनात्मक थकावट को बयां करता है जो बेचैनी और उलझनों से होती है। शायर कहते हैं कि वे बेताबियों से तंग आ चुके हैं, यानी वे बेचैनी से थक गए हैं। लेकिन असली सुकून तब मिलता है, जब शंका या अनिश्चितता का समय गुज़र जाता है। यह जीवन के तूफ़ान के बाद मिलने वाली शांति का एहसास है।

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