दरपय ख़ून 'मीर' ही न रहो — मीर तक़ी मीर
दरपय ख़ून 'मीर' ही न रहो
हो भी जाता है जुर्म आदम से
“Darapay Khoon, 'Mir,' do not remain, for even a sin is committed against Adam.”
— मीर तक़ी मीर
अर्थ
दरपय ख़ून, मीर, आप ऐसे नहीं रह सकते, क्योंकि आदम से भी गुनाह हो जाता है।
विस्तार
यह शेर सिर्फ़ खून-खराबे की बात नहीं करता, बल्कि इंसान की आत्मा के बोझ को बयां करता है। मिर्ज़ा तय़म टी मिर् के माध्यम से शायर कहते हैं कि जीवन को हिंसा से नहीं जीना चाहिए... क्योंकि कहीं न कहीं, उस हिंसा का अंजाम भी 'आदम' के गुनाह से कम नहीं हो सकता। यह एक गहरी नैतिक चेतावनी है कि कर्मों का हिसाब सिर्फ़ दुनिया में नहीं होता।
Interpretation note: meanings and explanations may be AI-assisted and should not replace a primary text or scholarly edition. See the editorial policy.
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