ऐ चर्ख़ न तू रोज़-ए-सियह 'मीर' पे लाना
बेचारा वो इक नारा-ज़न नीम-शबी है
“O Charkh, do not bring me to the day of blackness, Meer; that poor boy is a night-time, fragrant whisper.”
— मीर तक़ी मीर
अर्थ
ऐ चर्ख़, तू मुझे रोज़-ए-सियह पर मत लाना; बेचारा वो एक नारा-ज़न नीम-शबी है।
विस्तार
इस उदास शेर में, मीर तक़ी मीर ने किस्मत को संबोधित करते हुए कहा है कि वह 'ग़म के दिन' (रोज़-ए-सियह) न लाए। 'नारा-ज़न नीम-शबी' से तात्पर्य किसी अर्ध-अंधेरे, शोर मचाने वाले या बेचैन व्यक्ति से है। शायर कह रहे हैं कि बस उस व्यक्ति या स्थिति का अस्तित्व ही उनके जीवन में गहरा दुख और उदासी भर देता है। यह निराशा और थकान का गहरा भाव है।
Interpretation note: meanings and explanations may be AI-assisted and should not replace a primary text or scholarly edition. See the editorial policy.
ऑडियो
पाठ
हिंदी अर्थ
अंग्रेज़ी अर्थ
हिंदी विस्तार
अंग्रेज़ी विस्तार
Comments · 0
Free — just your email. You'll come right back here.
No comments yet. Be the first.
← Prev5 / 5
