कहाँ तक ग़ैर जासूसी के लेने को लगा आवे इलाही इस बला-ए-ना-गहाँ पर भी बला आवे

“How far did you think you would bring the trouble of espionage? Even on this calamity of the world, calamity comes.”

— मीर तक़ी मीर
अर्थ

ग़ैर जासूसी के लेने को तुम कहाँ तक लगा आए? हे इलाही! इस दुनिया की विपत्ति पर भी विपत्ति आती है।

विस्तार

मिर्ज़ा तक़ी मीर इस शेर में इंसानों की अत्यधिक जिज्ञासा और जासूसी को तंज़ किया है। शायर कहते हैं कि ज़िंदगी अपने आप में एक 'बला' है, लेकिन लोग दूसरों के मामलों में नाक घुसाकर, अपनी 'ग़ैर जासूसी' से और मुसीबतें मोल लेते हैं। यह समाज की दखलंदाज़ी और गपशप के बोझ पर एक गहरा कटाक्ष है।

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