ये तुम्हारी इन दिनों दोस्ताँ मिज़ा जिस के ग़म में है ख़ूँ-चकाँ — मीर तक़ी मीर
“These friends of yours, whose moods are such, whose sorrow is so deep, Those very calamities of the lover's heart, at times were also friends to us.”
अर्थ
ये तुम्हारे दोस्त आजकल ऐसे हैं, जिनका मिज़ाज और ग़म बहुत गहरा है। वे वही आफ़त हैं जो आशिक़ों के दिल में होती हैं, और कभी-कभी वे हमारे लिए भी दोस्त थे।
विस्तार
ये दोस्ताँ, जिनका मिज़ाज इतना उतार-चढ़ाव वाला है, और जिनका ग़म इतना गहरा है, वो आफ़त ही हैं जो कभी-कभी आशिक़ के लिए दोस्त बन जाती हैं। मिर्ज़ा तक़ी मीर इस ग़म को एक अनोखे नज़रिए से देखते हैं, जहाँ दर्द और दर्द देने वाले दोस्त एक ही सिक्के के दो पहलू हैं। उनका मानना है कि कुछ रिश्ते इतने जटिल होते हैं कि दुख ही कभी-कभी सहारा बन जाता है।
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