आगे हमारे अहद से वहशत को जा न थी दीवानगी कसो की भी ज़ंजीर-ए-पा न थी

“Before me, the wilderness was unknown to his covenant, His madness was also beyond the chains of fate.”

— मीर तक़ी मीर
अर्थ

मेरे आगे, वह जंगल (वन) उसके वचन से अनजान था, और उसका पागलपन भी नियति की ज़ंजीरों से परे था।

विस्तार

यह शेर उस गहरे इश्क़ की बात करता है, जो इंसान को हर बंधन से आज़ाद कर देता है। शायर कह रहे हैं कि जब आपका प्यार इतना गहरा हो जाता है, तो न डर का कोई अहद बचता है.... न ही दीवानगी की कोई ज़ंजीर। यह वो अवस्था है जब रूह बस महबूब के नाम हो जाती है!

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