Sukhan AI
वो दहाँ वो कमर ही है मक़्सूद
और कुछ अब नहीं ख़याल हमें

Only that place, only that waist is desired, Nothing else is in our thoughts now.

मीर तक़ी मीर
अर्थ

वो जगह और वो कमर ही हमारे लिए मंज़ूर है, और अब हमारे मन में कोई और ख़याल नहीं है।

विस्तार

इस शेर में शायर ने इश्क़ की उस हालत को बयान किया है जब किसी एक ख़ूबसूरती पर दिल का पूरी तरह से फ़िदा हो जाना। यह कहना कि 'वो दहाँ वो कमर ही है मक़्सूद,' मतलब है कि अब किसी और चीज़ का ख़याल नहीं रहता। महबूब की एक ख़ास नज़ाकत ने आशिक़ की दुनिया को अपनी गिरफ्त में ले लिया है।

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पाठ
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