सौ बार हम ने गुल के कहे पर चमन के बीच भर दी हैं आब-ए-चश्म से रातों को क्यारियाँ

“Though we spoke a hundred times of the garden's bloom, amidst the garden's heart, what little trenches have been made with the water of the spring through the nights?”

— मीर तक़ी मीर
अर्थ

हमने कितनी ही बार गुल के बारे में बात की है, पर बगीचे के बीचों-बीच, रात भर चश्मे के पानी से क्यारियां बनाने का क्या फायदा?

विस्तार

यह शेर एक दिल टूटने का वह दर्द बयान करता है जो बार-बार होता है। शायर कहते हैं कि हमने सौ बार.... सिर्फ़ फूलों की बातों पर... अपनी रातों को आँसुओं से भर दिया है। यहाँ 'गुल' सिर्फ फूल नहीं हैं, ये महबूब की बातें हैं... या उनकी यादें हैं। यह दर्द एक बार का नहीं, बल्कि एक सिलसिला है! यह दर्शाता है कि कैसे किसी की छोटी सी बात या कोई खूबसूरत नज़ारा भी इंसान को बार-बार रुला सकता है। यह इश्क़ का गहरा, लयामिक दर्द है।

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