शब 'मीर' से मिले हम इक वहम रह गया है
उस के ख़्याल-ए-मू में अब तो गया बहुत लट
“From the 'Mir' that I met, a delusion remains, In the thoughts of him, now a great amount has slipped away.”
— मीर तक़ी मीर
अर्थ
शायर 'मीर' से मिले हम इक वहम रह गया है, और उसके ख़यालों के सागर में अब तो बहुत कुछ बह गया है।
विस्तार
यह शेर यादों और भ्रम के गहरे रिश्ते को दिखाता है। शायर कहते हैं कि उन्हें एक ऐसा वहम मिला है जो पीछा नहीं छोड़ता। यह वहम, महबूब की यादों से जुड़ा है, और इसी याद में उनका बहुत समय, बहुत ज़िंदगी गुज़र गई है। यह एक दर्दभरा एहसास है कि कैसे एक छोटी सी याद भी इंसान के वजूद को खाए जाती है।
Comments
Read-only on web. Join the conversation in the Sukhan AI mobile app.
No comments yet.
← Prev9 / 9
