सो काहे को अपनी तू जोगी की सी फेरी है
बरसों में कभू ईधर हम आन निकलते हैं
“Oh, why is your life like that of a wandering ascetic? In years, we never leave this place.”
— मीर तक़ी मीर
अर्थ
अर्थ यह है कि तुम ऐसा क्यों करती हो, जैसे कि तुम्हारी जीवन यात्रा एक घुमंतू योगी की है? हम तो बरसों से कभी इस जगह से बाहर नहीं निकलते हैं।
विस्तार
यह शेर उस बेचैनी और सवाल को बयान करता है जब कोई अपना हमसे दूर भटकता है। शायर पूछते हैं, 'तुम जोगी की तरह क्यों घूमते हो?' क्योंकि उनके लिए, यह जगह, यह एहसास, सब कुछ स्थायी है। यह पंक्तियाँ उस गहरे जुड़ाव और स्थिरता को दर्शाती हैं, जिसे कोई भी सफर तोड़ नहीं सकता।
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