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करिए तो गिला किस से जैसी थी हमें ख़्वाहिश
अब वैसे ही ये अपने अरमान निकलते हैं

To whom should I complain, whose desire was like ours? Now our own aspirations emerge in the same way.

मीर तक़ी मीर
अर्थ

किए तो गिला किससे, जैसी थी हमें ख़्वाहिश। अब वैसे ही ये अपने अरमान निकलते हैं।

विस्तार

यह शेर बहुत ही गहरे एहसास को बयां करता है। शायर कह रहे हैं कि शिकायत किस बात की करें, क्योंकि हमारी ख़्वाहिशें तो हमेशा से वैसी ही थीं। हमारे अरमानों में कोई नयापन नहीं आया है, बस वो उसी पुराने अंदाज़ में निकल रहे हैं। यह इकरार-ए-हक़ीक़त है कि कुछ एहसास तो बस रूह का हिस्सा होते हैं, जिन्हें रोका नहीं जा सकता।

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