“Affected by the yearning for just a little bit of you, When my heart became restless, I died of despair.”
तुझसे थोड़ा सा भी कुछ होने की चाहत के वशीभूत होकर, जब मेरा मन बेचैन हो गया, तो मैं निराशा से मर गया।
यह शेर उस तीव्र चाहत की बात करता है, जो हमें किसी के करीब खींचती है। शायर कहते हैं कि वह केवल 'दो-चार होने की हसरत' (बस थोड़ा सा मिलना) से ही मुब्तिला था। लेकिन जब यह चाहत वबाल हो गई, जब दिल ने अपनी हद पार कर दी.... तो वह नचार (संकोची) मर गया। यह उस जुनून की विडंबना है, जब चाहत इतनी बढ़ जाती है कि हम खुद को रोक नहीं पाते, और कहीं न कहीं 'मर' जाते हैं!
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