गाली झिड़की ख़श्म-ओ-ख़ुशूनत ये तो सर-ए-दस्त अक्सर हैं लुत्फ़ गया एहसान गया इनआ'म गया इकराम गया

“This slanderous beauty, this charm, these are often just on the hand (or passing), the favor is gone, the grace is gone, the honor is gone.”

— मीर तक़ी मीर
अर्थ

यह गाली जैसी सुंदरता, यह आकर्षण, अक्सर केवल दिखावा होते हैं। नजाकत (लुत्फ़) चली गई, एहसान चला गया, इनआमत (उपहार) चला गया, और सम्मान (इकराम) भी चला गया।

विस्तार

मीर तक़ी मीर ने यहाँ एक बहुत गहरी बात कही है। वो कहते हैं कि ख़ूबसूरती और नज़ाकत तो अक्सर मिल जाती है और चली भी जाती है। लेकिन असली दर्द क्या है? असली दर्द है जब कोई आपका लुत्फ़ उठा ले, आपका एहसान भुला दे, या आपका सम्मान छीन ले। ये एहसास खोने का दर्द, किसी भी सुंदरता से कहीं ज़्यादा गहरा होता है।

Interpretation note: meanings and explanations may be AI-assisted and should not replace a primary text or scholarly edition. See the editorial policy.

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