“Whose separation do you mourn, who is the wanderer? The dreams have fled, the zeal is gone, the peace is lost, the rest is gone.”
किस-किस के विरह में व्याकुल है वह जो दूर भटकता हुआ है। उसके सपने चले गए हैं, उसका उत्साह चला गया है, उसकी शांति चली गई है, और उसका आराम चला गया है।
यह शेर बिछड़ने के दर्द को बहुत गहराई से बयां करता है। शायर पूछ रहे हैं कि जब हम किसी से दूर होते हैं, तो कल का कोई सपना कैसे देखा जा सकता है? दूसरी लाइन में तो पूरी तरह से खालीपन है—ख़्वाब भी गए, ताब भी गए, चैन भी गया, और आराम भी गया। यह सिर्फ़ दर्द नहीं है, यह ज़िंदगी की हर खुशी के खो जाने का एहसास है।
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