नाज़ुकी उस के लब की क्या कहिए
पंखुड़ी इक गुलाब की सी है
“How can I describe the softness of her lips? They are like the petal of a rose.”
— मीर तक़ी मीर
अर्थ
नाज़ुकी उनके होंठों की क्या कहूँ, वे तो गुलाब की पंखुड़ी जैसी हैं।
विस्तार
यह शेर महबूब की नज़ाकत का एक बहुत ही खूबसूरत इज़हार है। शायर उन लबों की नाज़ुकी से इतने मुग्ध हैं कि उनकी तुलना गुलाब की एक कोमल पंखुड़ी से कर रहे हैं। यह एक साधारण सा इल्ज़ाम है, लेकिन यह महबूब के सौंदर्य और नज़ाकत को बहुत गहराई से बयान करता है। यह एहसास कि महबूब की बातें भी कितनी नाज़ुक होती हैं।
Interpretation note: meanings and explanations may be AI-assisted and should not replace a primary text or scholarly edition. See the editorial policy.
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