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हया से नहीं पुश्त-ए-पा पर वो चश्म
मिरा हाल मद्द-ए-नज़र कुछ नहीं

From the threshold of your lineage, those eyes do not pour, / For my condition is nothing before your gaze.

मीर तक़ी मीर
अर्थ

ये आँखें शर्म से नहीं, बल्कि आपके कुल की मर्यादा से बहती हैं। मेरी हालत तो आपके एक नज़र के सामने कुछ भी नहीं है।

विस्तार

यह शेर एक गहरे और जटिल रिश्ते को बयान करता है। शायर कहते हैं कि जिस नज़र से देखा जा रहा है, वह महज़ शरम या हिचक नहीं है। यह नज़र किसी सतही चीज़ पर नहीं टिकी है, बल्कि इसमें एक गहरा एहसास है। शायर अपनी बात कहकर यह समझा रहे हैं कि उनका हाल या उनकी पहचान सिर्फ़ किसी की नज़रों से नहीं तय होती।

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