ऐसे वहशी कहाँ हैं ऐ ख़ूबाँ
'मीर' को तुम अबस उदास किया
“Oh, where are those wild ones? My 'Mir', you have saddened us greatly.”
— मीर तक़ी मीर
अर्थ
हे वहशी कहाँ हैं ऐ ख़ूबाँ। 'मीर' को तुम अबस उदास किया।
विस्तार
यह शेर एक आशिक़ का दर्द है, जो अपने महबूब को कह रहा है कि तुम इतने वहशी, इतने मिज़ाज के मालिक कैसे हो? शायर कह रहे हैं कि तुम्हें बस मुझे उदास करने की ज़रूरत थी, और यह छोटी सी बात भी मेरे लिए बहुत बड़ी सज़ा बन गई। यह मोहब्बत के उस दर्द को बयान करता है, जहाँ महबूब का मन ही सबसे बड़ा तूफ़ान होता है।
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