दौर से चर्ख़ के निकल न सके ज़ोफ़ ने हम को मूरतास किया

“From the cycle of times, we could not escape, For the moment we were made by the master's hand.”

— मीर तक़ी मीर
अर्थ

समय के चक्र से हम बाहर नहीं निकल सके, क्योंकि हमारे अस्तित्व को उस्ताद ने ही बनाया था।

विस्तार

यह शेर समय की गति और इश्क़ की ताकत को बयान करता है। शायर कह रहे हैं कि दौर (समय का चक्र) एक बार चल पड़ा, तो रुकना नामुमकिन है। और जब ज़ौक़ ने हमें मुरासा (अनुमति) दी... तो समझिए, सब कुछ हाथ से निकल चुका है। यह उस एहसास की बात है, जब प्यार में डूबकर इंसान खुद को रोक नहीं पाता।

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