जीते तो 'मीर' उन ने मुझे दाग़ ही रक्खा — मीर तक़ी मीर
“If I lived, Meer left only the stain on me;”
अर्थ
यदि मैं जीवित रहता, तो मीर ने मुझ पर केवल दाग ही रखा; फिर भी, यदि मैंने गौर पर दीपक जलाया तो क्या हुआ।
विस्तार
यह शेर ज़िन्दगी के गहरे ज़ख्मों और उनकी अमरता को बयान करता है। 'दाग़' यहाँ किसी शारीरिक निशान की बात नहीं है, बल्कि वो दर्द है जो महबूब या दुनिया ने हमें ज़िंदा रखकर दिया। शायर पूछ रहे हैं कि अगर ज़िंदा होते हुए भी ये दाग़ बाकी रहा, तो मरने के बाद, जब हम कोहराम पर चराग़ जलाएंगे, तो क्या फ़र्क़ पड़ेगा? ये दर्द, ये यादें, ये दाग़... ये मौत से भी ज़्यादा क़ायम होते हैं।
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