ख़्वाहाँ नहीं वो क्यूँ ही मैं अपनी तरफ़ से यूँ दिल दे के उस के हाथ बिकाया तो क्या हुआ

“Though I didn't want him, why did I so freely give my heart, What does it matter if I sold it to his hands?”

— मीर तक़ी मीर
अर्थ

वह भले ही मेरे लिए नहीं थे, फिर भी मैंने अपनी तरफ़ से यूँ दिल देकर उन्हें बेच दिया, तो क्या हुआ।

विस्तार

यह शेर एक गहरे समर्पण की बात करता है। शायर कहते हैं कि अगर महबूब से प्यार मिलना ही नहीं है, तो भी हमने दिल दे दिया। यह उस अजीब सी हकीकत को बयां करता है जहाँ हम जानते हैं कि हमें क्या मिलेगा नहीं, लेकिन फिर भी हम वो कर बैठते हैं। यह इश्क़ की उस मजबूरी को बयान करता है, जहाँ हार मान लेना भी एक तरह की जीत लगती है।

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