न शिकवा शिकायत न हर्फ़-ओ-हिकायत कहो 'मीर' जी आज क्यूँ हो ख़फ़ा से

“Do not teach complaint, nor tale of stories, Say, 'Mir,' why are you angry today?”

— मीर तक़ी मीर
अर्थ

न शिकायत और न कोई कहानी-शिकायत है, कहो 'मीर' जी आज क्यों हो नाराज़ से।

विस्तार

यह शेर मिर्ज़ा तक़ी मीर का एक बहुत ही गहरा और दिल को छू लेने वाला नज़्म है। शायर अपने महबूब से पूछ रहे हैं, 'आज क्यों ख़फ़ा हो?' और साथ में कह रहे हैं कि कोई शिकायत नहीं, कोई बात नहीं.... मतलब, मैं कोई गलती नहीं कर रहा हूँ। शायर यह कह रहे हैं कि शायद नाराज़गी का कारण मेरे होने से नहीं, बल्कि किसी और वजह से है, और वे बस साफ़-साफ़ बात जानना चाहते हैं।

Interpretation note: meanings and explanations may be AI-assisted and should not replace a primary text or scholarly edition. See the editorial policy.

ऑडियो

पाठ
हिंदी अर्थ
अंग्रेज़ी अर्थ
हिंदी विस्तार
अंग्रेज़ी विस्तार
Comments · 0

Free — just your email. You'll come right back here.

No comments yet. Be the first.

← Prev10 / 10