टपका करे है आँख से लोहू ही रोज़-ओ-शब
चेहरे पे मेरे चश्म है या कोई घाव है
“A stream of blood flows from my eye, day and night, Is it my spectacle lens, or merely a wound's blight?”
— मीर तक़ी मीर
अर्थ
आँख से रोज़-ओ-शब लहू टपकना, यह मेरे चश्मे का लेंस है या कोई गहरा घाव।
विस्तार
यह शेर उस गहरे दर्द को बयां करता है, जो आंखों से कभी रुकता नहीं। शायर कहते हैं कि मेरे आंसू रोज़-ओ-शब खून की तरह टपकते हैं। यह दर्द इतना गहरा है कि अब उन्हें खुद भी शक है—क्या ये सिर्फ़ चश्मे का नज़ारा है, या मेरे चेहरे पर कोई गहरा ज़ख़्म है? यह इश्क़ के उस दर्द को बयां करता है, जो रूह को तकलीफ़ देता है।
Interpretation note: meanings and explanations may be AI-assisted and should not replace a primary text or scholarly edition. See the editorial policy.
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