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यूँ उठे आह उस गली से हम जैसे कोई जहाँ से उठता है

As if we rose from that alleyway, Like someone rising from a place of being.

मीर तक़ी मीर
अर्थ

यूँ उठे आह उस गली से हम, जैसे कोई जहाँ से उठता है।

विस्तार

यह शेर एक विदाई के पल को बयान करता है, जब आप किसी जगह से उठते हैं। मिर्ज़ा तक़ी मीर कहते हैं कि उस गली से उठना भी उतना ही स्वाभाविक था, जितना कि कहीं और से उठना। इसमें जाने का दर्द और आगे बढ़ने की सहजता दोनों है। यह बताता है कि यादें हमें कैसे गढ़ती हैं, और कभी-कभी बिछड़ना अंत नहीं, बल्कि बस एक प्राकृतिक बदलाव होता है।

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