प्राण गंवाया झूरता रे, नैन गंवाया दोनु रोय।।2।।
“My life was wasted, lamenting, oh, both my eyes were lost, crying so.”
— मीराबाई
अर्थ
मैंने अपना जीवन विलाप करते हुए गंवा दिया, और लगातार रोते रहने से मेरी दोनों आँखें भी जाती रहीं।
विस्तार
यह दोहा गहरे दुख और निराशा की मार्मिक तस्वीर प्रस्तुत करता है। इसका अर्थ है कि किसी व्यक्ति ने लगातार दुख और विरह में घुल-घुल कर अपने जीवन की शक्ति को व्यर्थ कर दिया है। इस गहरे दर्द से जुड़े निरंतर रोने से न केवल उनकी आत्मा क्षीण हुई है, बल्कि उनके शरीर पर भी असर पड़ा है, जिससे पता चलता है कि उन्होंने अथाह आँसुओं के कारण अपनी आँखों की रोशनी भी खो दी है। यह पूरी तरह से निराशा की स्थिति को सशक्त रूप से व्यक्त करता है, जहाँ शारीरिक और प्राणिक ऊर्जा दोनों ही दुख से नष्ट हो जाती हैं।
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