अन्न नहीं भावे नींद न आवे विरह सतावे मोय।
“No food I crave, no sleep I find, separation tortures my mind.”
— मीराबाई
अर्थ
मुझे अन्न अच्छा नहीं लगता, नींद नहीं आती और विरह मुझे सताता है।
विस्तार
यह दोहा किसी प्रियजन से बिछड़ने की गहरी पीड़ा को बहुत सुंदर ढंग से व्यक्त करता है। वक्ता विरह की अग्नि में इतना जल रहे हैं कि उन्हें भोजन में कोई स्वाद नहीं आता और रात भर नींद भी नहीं आती। प्रिय की अनुपस्थिति उन्हें हर पल सता रही है। यह दिखाता है कि कैसे भावनात्मक दर्द व्यक्ति के शारीरिक स्वास्थ्य को भी प्रभावित कर सकता है। यह एक अशांत और दुखी हृदय की मार्मिक अभिव्यक्ति है, जो अपने प्रिय से मिलन की उत्कट इच्छा रखता है।
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