वस्तु अमोलक दी म्हारे सतगुरू, किरपा कर अपनायो॥

“My True Guru bestowed upon me a priceless treasure, And with His grace, He took me as His own.”

— मीराबाई
अर्थ

मेरे सतगुरु ने मुझे एक अनमोल वस्तु दी और कृपा करके मुझे अपना बना लिया।

विस्तार

यह दोहा गुरु और शिष्य के पवित्र रिश्ते और शिष्य की कृतज्ञता को दर्शाता है। इसका अर्थ है, "मेरे सच्चे गुरु ने मुझे एक अमूल्य वस्तु प्रदान की, और अपनी असीम कृपा से मुझे अपना बना लिया।" यहाँ 'अमूल्य वस्तु' कोई भौतिक चीज़ नहीं, बल्कि अनमोल आध्यात्मिक ज्ञान, मार्गदर्शन, या आत्म-साक्षात्कार का मार्ग है जो गुरु शिष्य को देते हैं। 'अपना बना लिया' यह दर्शाता है कि गुरु ने शिष्य को अपने संरक्षण में लिया, उसे आशीर्वाद दिया, और उसे सही मार्ग पर चलने में मदद की। यह गुरु की करुणा और शिष्य के सौभाग्य को उजागर करता है कि उसे ऐसा मार्गदर्शक मिला।

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