માનવના તે ગુનાની સજા શું હશે ‘મરીઝ’, જેનું નથી બયાન ખુદાની કિતાબમાં.

“What punishment will there be, 'Mariz', for that sin of man,Whose description is not even in God's book?”

— मरीज़
अर्थ

ऐ मरीज़, इंसान के उस गुनाह की क्या सज़ा होगी जिसका वर्णन ख़ुदा की किताब में भी नहीं है? यह उस पाप की ओर संकेत करता है जो इतना असाधारण या गंभीर है कि उसका उल्लेख भी धार्मिक ग्रंथों में नहीं है।

विस्तार

इस शेर में कवि ‘मरीज़’ एक गहरा सवाल पूछते हैं: इंसान के उस गुनाह की क्या सज़ा होगी, जिसका ज़िक्र ख़ुदा की किसी भी आसमानी किताब में नहीं किया गया है? यह शेर ऐसे गुनाह की बात करता है जो इतना अजीब या भयानक है कि वह ईश्वरीय क़ानूनों और धार्मिक ग्रंथों की ज्ञात सीमाओं से भी बाहर है। यह हमें उन कामों के अंजाम के बारे में सोचने पर मजबूर करता है जो सही और गलत की हमारी सामान्य समझ को चुनौती देते हैं। ऐसे गुनाहों की ईश्वरीय सज़ा क्या होगी, यह एक रहस्यमय और परेशान करने वाला सवाल है। यह ईश्वरीय न्याय की सीमाओं और इंसान के स्वभाव के गहरे पहलुओं पर एक सशक्त विचार है।

Interpretation note: meanings and explanations may be AI-assisted and should not replace a primary text or scholarly edition. See the editorial policy.

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