उस को निकाले कोई किस तौर से तीर-ए-मिज़ा सीने में घर कर गया

“By what means could anyone ever draw it out? The arrow of her lashes has made a home within my chest.”

— ख़्वाजा रुक्नुद्दीन इश्क़
अर्थ

कोई उसे किस तरह बाहर निकाले? महबूब की पलकों का तीर सीने में पूरी तरह समा कर अपना घर बना चुका है।

विस्तार

उर्दू शायरी में महबूब की पलकों और तीखी नज़रों को अक्सर तीर कहा जाता है, लेकिन यहाँ शायर ने इस ख़याल को एक ख़ूबसूरत मोड़ दिया है। वह तीर सिर्फ़ दिल में चुभा नहीं, बल्कि सीने में उसने अपना घर बना लिया है। अब उसे कोई भला कैसे निकाल सकता है, क्योंकि महबूब के इश्क़ का यह मीठा दर्द अब आशिक़ के वजूद का ही एक हिस्सा बन चुका है।

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