“As Unity unveiled itself to sight, Creator and creation came to light.”
जब एकत्व (वाहिदियत) प्रकट हुआ, तब स्रष्टा (ख़ालिक़) और सृष्टि (ख़ल्क़) दोनों का अस्तित्व वजूद में आया।
सूफ़ी फलसफ़े में यह माना जाता है कि शुरुआत में सिर्फ़ एक ही हक़ीक़त थी, लेकिन जब उस परम सत्य ने ख़ुद को ज़ाहिर करने की चाह की, तो सारा जहान वजूद में आ गया। इस शेर में शायर उसी जादुई पल को बयान कर रहे हैं जब एकता ने विविधता का रूप लिया। जैसे ही ख़ुदा ने अपना अक्स देखना चाहा, एक तरफ़ बनाने वाला (ख़ालिक़) नज़र आया और दूसरी तरफ़ बनी हुई दुनिया (ख़ल्क़)—जबकि गहराई में दोनों एक ही नूर का विस्तार हैं।
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