ख़ुदा मजज़ूब को रखे सलामत उस ने चौंकाया जिसे मंज़िल समझ रखा था वो इक ख़्वाब-ए-मंज़िल था

“May God keep the mystic safe, for he has startled me awake: what I had taken for the destination was merely a dream of the journey's end.”

— ख़्वाजा अज़ीज़ुल हसन मजज़ूब
अर्थ

ईश्वर मजज़ूब को सलामत रखे क्योंकि उसने मुझे चौंका कर जगा दिया, जिसे मैं अपनी मंज़िल समझ बैठा था वह केवल मंज़िल का एक ख़्वाब था।

विस्तार

ज़िंदगी या रूहानी सफ़र में कई बार हम किसी पड़ाव को ही आख़िरी मंज़िल मानकर ठहर जाते हैं और एक मीठे मुग़ालते में खो जाते हैं। शायर उस 'मजज़ूब' (मस्त फ़क़ीर) के लिए दिल से दुआ करता है, जिसकी एक झिड़की या आवाज़ ने उसे इस ग़फ़लत की नींद से अचानक चौंका कर जगा दिया। यह शेर हमें समझाता है कि जिसे हम मंज़िल समझकर मुतमइन बैठे थे, वह तो महज़ एक ख़्वाब था और असल सफ़र तो अभी बाक़ी है।

Interpretation note: meanings and explanations may be AI-assisted and should not replace a primary text or scholarly edition. See the editorial policy.

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