दिल-ए-वारस्ता ही अपना अकेला रह गया आख़िर बहुत थे हमसफ़र लेकिन हर इक पाबंद-ए-मंज़िल था

“In the end, only my untethered heart was left all alone; companions were many, but each was bound to a destination.”

— ख़्वाजा अज़ीज़ुल हसन मजज़ूब
अर्थ

आखिरकार केवल मेरा आज़ाद और बेपरवाह दिल ही अकेला रह गया; साथ चलने वाले तो बहुत थे लेकिन हर कोई अपनी मंज़िल से बँधा हुआ था।

विस्तार

इस शेर में शायर उस आज़ाद और बेपरवाह दिल (दिल-ए-वारस्ता) की तन्हाई बयां कर रहे हैं, जो किसी तयशुदा मंज़िल का मोहताज नहीं है। ज़िन्दगी के सफ़र में कई हमसफ़र मिलते तो हैं, मगर उन सब की अपनी गर्ज़, मक़सद और मंज़िलें होती हैं; जैसे ही उनका पड़ाव आता है, वे रुक जाते हैं। सिर्फ़ वही रूह आख़िर में अकेली रह जाती है जो मंज़िल पाने के लिए नहीं, बल्कि महज़ सफ़र के इश्क़ और आज़ादी में चलती रही।

Interpretation note: meanings and explanations may be AI-assisted and should not replace a primary text or scholarly edition. See the editorial policy.

ऑडियो

पाठUnavailable
हिंदी अर्थUnavailable
अंग्रेज़ी अर्थUnavailable
हिंदी विस्तारUnavailable
अंग्रेज़ी विस्तारUnavailable
Comments · 0

Free — just your email. You'll come right back here.

No comments yet. Be the first.