“Let all be happy in what brings them joy, I will do what makes me glad;"What was that? What has this become now?" No one will ever ask.”
सब खुश रहें जिसमें खुशी है, मैं वही करूंगा जिसमें मुझे खुशी मिले। कोई नहीं पूछेगा, "वह क्या था? यह क्या हो गया?"
यह दोहा हमें दिल से उस काम को करने के लिए प्रेरित करता है जो हमें खुशी देता है। यह कहता है कि हर किसी को अपनी खुशी का स्रोत ढूंढना चाहिए और उसे सक्रिय रूप से अपनाना चाहिए। दूसरी पंक्ति बहुत खूबसूरती से यह विश्वास दिलाती है कि जब आप वास्तव में अपने दिल की इच्छाओं के अनुसार जीते हैं और वही करते हैं जो आपको खुश करता है, तो आप यह नहीं सोचेंगे, 'वह क्या था? अब क्या हुआ?' आपके निर्णयों पर पछतावा या दूसरा विचार करने की कोई गुंजाइश नहीं होगी। यह एक ऐसा प्रामाणिक और संतोषजनक जीवन जीने के बारे में है जहाँ आप स्वाभाविक रूप से अपने रास्ते को स्वीकार करते हैं, संदेह या अतीत के सवालों से मुक्त, क्योंकि आपने खुशी चुनी है।
Interpretation note: meanings and explanations may be AI-assisted and should not replace a primary text or scholarly edition. See the editorial policy.
ऑडियो
Free — just your email. You'll come right back here.
No comments yet. Be the first.
