“Ah! Of love's myriad colors, there's a goblet of singular hue;We are the drinkers of such a cup, making us the most intoxicated of the intoxicated.”
आह! प्रेम के लाखों रंगों के बीच एक अद्वितीय रंग का जाम है; हम ऐसे जाम को पीने वाले हैं, जो हमें मस्तों में भी सबसे मस्त बना देता है।
यह खूबसूरत शेर कहता है कि इश्क़ लाखों रंगों का है, पर उसका जाम एक ही रंग का है। इसका मतलब है कि प्यार के भले ही कितने ही रूप हों, कितनी ही भावनाएँ हों, पर उसका असली एहसास, उसका नशा, बिल्कुल अनोखा और एक ही होता है। फिर शायर कहते हैं, 'हम तो मस्तानों के भी मस्तान हैं, जो ऐसा जाम पीते हैं।' यानी वे प्यार में इतने डूबे हुए हैं कि उन्हें किसी और चीज़ की सुध नहीं। वे प्यार के इस गहरे और अद्वितीय रंग में पूरी तरह सराबोर हैं, उससे पूरी तरह मस्त हैं।
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