जो जाने जीव आपना , करहीं जीव का सार। जीवा ऐसा पाहौना , मिले न दीजी बार॥ 200॥
“He who knows his own soul, and understands the essence of life. Such a soul is hard to find, and rarely seen.”
— कबीर
अर्थ
जो व्यक्ति अपने जीव को जानता है और जीवन के सार को समझता है, ऐसा जीव पाना कठिन है और यह दुर्लभ होता है।
विस्तार
कबीर दास जी कहते हैं कि अपनी आत्मा को गहराई से जानना और जीवन के असली सार को समझना बहुत दुर्लभ है। जो व्यक्ति ऐसा कर पाता है, वह किसी अनमोल मेहमान जैसा होता है जो बार-बार नहीं मिलता। ऐसे ज्ञानी व्यक्ति की संगति बड़ी मुश्किल से मिलती है, इसलिए जब ऐसा अवसर मिले तो उसे गँवाना नहीं चाहिए और उसका पूरा आदर करना चाहिए। यह आत्मज्ञान ही जीवन का सबसे बड़ा खजाना है।
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